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सिरसा में पंचायती तालाबों के जीर्णोद्धार पर 60% तक अनुदान, यहां जाने पूरा जानकारी

 
हरियाणा पंचायती तालाब जीर्णोद्धार अनुदान योजना 2026 - मत्स्य पालन विभाग 60 प्रतिशत सब्सिडी

सिरसा/हरियाणा। मत्स्य पालन विभाग ने पंचायती तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए अनुदान योजना लागू की है। यह योजना सघन मत्स्य विकास कार्यक्रम के तहत शुरू की गई है, जिसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन को बढ़ावा देना और पंचायती तालाबों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।

योजना के तहत पात्र मछली पालकों को तालाबों के नवीनीकरण और सुधार के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। विभाग का कहना है कि इस पहल से ग्रामीण इलाकों में मछली उत्पादन बढ़ेगा और रोजगार के साथ-साथ आय में भी इजाफा होगा।

परियोजना लागत और अनुदान की राशि

इस योजना के तहत परियोजना लागत दो लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है। सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। वहीं, अनुसूचित जाति और महिला लाभार्थियों के लिए यह अनुदान 60 प्रतिशत तक होगा। एक लाभार्थी को अधिकतम चार हेक्टेयर क्षेत्र तक ही इस योजना का लाभ दिया जाएगा।

योजना का लाभ सिर्फ पंचायती तालाबों और सरकारी जलाशयों के लिए ही उपलब्ध होगा। इसके अलावा अनुदान तीन साल में सिर्फ एक बार ही दिया जाएगा। विभाग ने साफ किया है कि योजना का लाभ उन्हीं तालाबों पर मिलेगा जो लगातार तीन साल या उससे ज्यादा समय से मछली पालन के तहत हैं। इसका उद्देश्य ऐसे जलाशयों का वैज्ञानिक तरीके से जीर्णोद्धार कर उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना है।

कौन ले सकता है योजना का लाभ

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। लाभार्थी हरियाणा का स्थायी निवासी होना चाहिए और उसकी उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। साथ ही आवेदक किसी भी सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्था में नौकरी नहीं कर रहा होना चाहिए। विभाग ने पात्रता की इन शर्तों का पालन करना अनिवार्य बताया है।

आवेदन के साथ ये दस्तावेज लगाने होंगे

योजना के लिए आवेदन करते समय मछली पालक और विभाग के बीच किया गया अनुबंध पत्र-1, मछली पालक और पंचायत के बीच अनुबंध पत्र-2, जन्मतिथि प्रमाण पत्र, पहचान प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र (अगर लागू हो), किसी सरकारी संस्थान से मिला मत्स्य प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, भूमि से जुड़े अभिलेख, पंचायत का प्रस्ताव, पंचायत की पट्टा रसीद (संख्या-4), जीर्णोद्धार कार्य की वाउचर रसीद और कार्य से जुड़ी तस्वीरें जमा करनी होंगी। विभाग ने कहा है कि सभी दस्तावेज पूरे होने पर ही आवेदन पर विचार किया जाएगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि पंचायती तालाबों का वैज्ञानिक तरीके से जीर्णोद्धार होने से जलाशयों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और मछली पालन को नया प्रोत्साहन मिलेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार के मौके बढ़ेंगे, मछली पालकों की आमदनी बढ़ेगी और पंचायतों के संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। उन्होंने पात्र मछली पालकों से समय पर आवेदन कर योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने की अपील की है।
 

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