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सिरसा में निजी व पंचायती तालाबों की मरम्मत के लिए हरियाणा सरकार दे रही 1 लाख रुपये, आज ही करें अप्लाई

 
Haryana Fisheries Department pond renovation subsidy scheme 2026 for fish and shrimp farming

सिरसा। हरियाणा सरकार ने मत्स्य पालन और झींगा पालन (श्रिम्प फार्मिंग) को बढ़ावा देने के लिए राज्य के पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए सब्सिडी योजना शुरू की है। जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र के अनुसार, इस योजना के तहत पिछले तीन साल या उससे अधिक समय से मछली पालन में इस्तेमाल हो रहे तालाबों की मरम्मत, सुधार और पुनर्निर्माण के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। 

यह योजना निजी भूमि के तालाबों के साथ-साथ पंचायत तालाबों, सरकारी जलाशयों, बांधों और झीलों पर भी लागू होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों की आय बढ़ेगी।

तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए सरकार ने परियोजना लागत 2 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तय की है। इस पर सरकार अधिकतम 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देगी। एक व्यक्तिगत लाभार्थी को अधिकतम 4 हेक्टेयर के लिए यह सहायता मिलेगी, जबकि सहकारी समितियों, एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन), स्वयं सहायता समूहों और झींगा क्लस्टर के लिए यह सीमा 20 हेक्टेयर तक रखी गई है। मत्स्य पालन विभाग के मुताबिक, यह अनुदान राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे भेजी जाएगी।

इन्हें मिलेगा योजना का लाभ

इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का हरियाणा राज्य का स्थायी निवासी होना जरूरी है। साथ ही उसके पास परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। सरकारी या अर्ध-सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति इस योजना के तहत आवेदन नहीं कर सकता। यह लाभ केवल उन्हीं तालाबों पर दिया जाएगा जो पिछले तीन साल या उससे अधिक समय से लगातार मछली या झींगा पालन के लिए इस्तेमाल हो रहे हों। तीन साल से कम समय से उपयोग में लाए जा रहे तालाब इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे।

क्या-क्या होंगे जरूरी दस्तावेज

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदकों को कई अहम दस्तावेज विभाग में जमा कराने होंगे। इनमें विभाग और मत्स्य किसान के बीच अनुबंध पत्र, पंचायत के साथ हुआ समझौता पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या आयु का कोई वैध प्रमाण, पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी), जाति प्रमाण पत्र (अगर लागू हो), मत्स्य पालन का प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (अगर हो तो), जिस जमीन पर तालाब है उसके भूमि रिकॉर्ड (जमाबंदी की नकल), नवीनतम कर रसीद और तालाब की साइट की फोटो शामिल हैं। इन दस्तावेजों की स्वयं सत्यापित प्रतियां (self-attested copies) आवेदन के साथ अटैच करनी होंगी।

ऐसे करें आवेदन

इस योजना के तहत आवेदन करने के लिए लाभार्थी अपने जिले के मत्स्य विभाग कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं या हरियाणा सरकार के आधिकारिक पोर्टल 'हरफिश' (harfish.gov.in) पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विभाग की ओर से समयबद्ध सेवाएं मुहैया कराने के लिए मत्स्य पालन से जुड़ी कई सेवाओं को हरियाणा अधिकार सेवा अधिनियम 2014 के दायरे में लाया गया है, जिसके तहत सब्सिडी 40 दिनों के भीतर जारी कर दी जाएगी。

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन को एक नई दिशा दे सकती है। तालाबों के जीर्णोद्धार से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, जिससे किसानों को अधिक आय प्राप्त होगी। साथ ही झींगा पालन को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे गांवों के युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। हरियाणा के खारे पानी वाले इलाकों, खासकर सिरसा, में झींगा पालन की काफी संभावनाएं हैं, जिससे रोजगार बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। 

इस योजना के तहत जहां तालाबों की मरम्मत होगी, वहीं नए तालाब खोदने और जलभराव वाली जमीन को दुरुस्त करने पर भी सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है। बीते दिनों सोनीपत जिले में पूर्व ईंट निर्माताओं के झींगा पालन की ओर रुख करने के मामले सामने आए हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को दिखाते हैं।

किसानों को मिल रही ये अन्य सहूलियतें

मत्स्य पालन विभाग के मुताबिक, सिर्फ तालाब जीर्णोद्धार ही नहीं, बल्कि मछली पालन से जुड़ी कई अन्य गतिविधियों पर भी सरकार सब्सिडी दे रही है। सोलर सिस्टम, फिशिंग नेट्स, मछली के चारे (पेलेटेड फीड), बीमा प्रीमियम और लोडिंग ऑटो या मिनी ट्रैक्टर पर भी सरकार अनुदान दे रही है। 

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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत हरियाणा में 3766 हेक्टेयर में नए तालाबों का निर्माण किया गया है और 326 बायोफ्लॉक यूनिट लगाई गई हैं। इन सबसे मछली पालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी और किसानों की आमदनी बढ़ाने में बड़ा योगदान होगा।
 

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