सिरसा: जोधकां की बेटी सविता पूनिया को मिला पद्मश्री, जाने गांव से से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
सिरसा/हरियाणा। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और मौजूदा गोलकीपर सविता पूनिया को मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री से सम्मानित किया। हरियाणा के सिरसा जिले के जोधकां गांव की बेटी सविता को यह सम्मान खेल के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया। राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति ने कुल 65 पद्म पुरस्कार प्रदान किए, जिनमें दो पद्म विभूषण, सात पद्म भूषण और 56 पद्मश्री शामिल थे।
पद्मश्री मिलने पर सविता ने क्या कहा
पद्मश्री मिलने के बाद सविता ने मीडिया से बातचीत में कहा, "यह सम्मान अपने आप में बहुत बड़ा है। एक वक्त वो था जब मैं घर से बाहर निकलने में डरती थी। परंतु आज मैं अपने परिवार के साथ राष्ट्रपति भवन में पहुंची हूं।" उन्होंने आगे कहा, "जब खेल के अतिरिक्त आपको कोई सम्मान मिलता है तो वह वास्तव में बड़ा सम्मान होता है। मैंने जब हॉकी खेलना शुरू किया था, तो कभी नहीं सोचा था कि मेरा सफर इतना लंबा होगा और मुझे इतने बड़े व्यक्तिगत सम्मान से नवाजा जाएगा।" सविता ने इस उपलब्धि को अपने परिवार और पूरी टीम की सफलता बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान मध्यमवर्गीय और ग्रामीण पृष्ठभूमि की युवा लड़कियों के लिए एक संदेश लेकर आता है - अगर वे लगन और मेहनत से सफलता हासिल कर सकती हैं, तो देश की कई और बेटियां भी अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं।

समारोह में शामिल हस्तियां
इस मौके पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और गृहमंत्री अमित शाह समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सविता पूनिया के अलावा क्रिकेटर रोहित शर्मा को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया। वहीं टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज को पद्म भूषण और जॉर्जियाई कोच व्लादिमीर मेस्टविरिश्विली को मरणोपरांत पद्मश्री दिया गया।
सिरसा के छोटे से गांव से निकली देश की शान
सविता पूनिया का जन्म 11 जून 1990 को हरियाणा के सिरसा जिले के जोधकां गांव में हुआ। उनके पिता महेंद्र सिंह स्वास्थ्य विभाग से फार्मासिस्ट के पद से रिटायर्ड हैं और डिंग पीएचसी में लंबे समय तक सेवाएं दीं। माता लीलावती गृहिणी हैं। सविता का बड़ा भाई भविष्य आईटीआई में नॉन-टीचिंग जॉब पर है और भाभी एग्रीकल्चर विभाग सिरसा में कार्यरत हैं।

सविता की शादी 2021 में हरियाणा के सोनीपत निवासी अंकित बल्हारा से हुई, जो कनाडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। ससुराल जाने के लिए उन्हें कनाडा जाना पड़ता है और बाकी समय खेल, ट्रेनिंग कैंप या मायके में गुजरता है।
दादा ने दी हॉकी खेलने की प्रेरणा
सविता अपने दादा रणजीत सिंह को रोल मॉडल मानती हैं। उनके दादा ने ही सविता को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया था। सविता ने एक इंटरव्यू में कहा था, "मुझे नहीं पता था कि हॉकी होती क्या है, मेरे दादा चाहते थे कि मैं हॉकी खेलूं।" बचपन में सविता और उनके दादा रेडियो पर हॉकी कमेंट्री सुना करते थे।
शुरुआत में साल 2003-2004 में सिरसा की अग्रसेन नर्सरी में खेलना शुरू किया। बाद में भारतीय हॉकी प्राधिकरण के हिसार साईं सेंटर में कोच आजाद सिंह मलिक के नेतृत्व में खेली। साल 2007 में भारतीय सीनियर नेशनल हॉकी कैंप के लिए सविता का चयन हुआ। इसके बाद 2011 में उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत हुई। लंबी हाइट और फुर्ती के कारण कोच ने उन्हें गोलकीपर चुना।
'द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया' कैसे बनीं सविता
टोक्यो ओलंपिक में सविता के शानदार गोलकीपिंग प्रदर्शन ने भारत को चौथे स्थान पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। क्वार्टरफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी अहम बचत ने उन्हें "द ग्रेट वॉल" की उपाधि दिलाई। वह पीआर श्रीजेश के बाद 300 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर हैं। उन्होंने फरवरी 2025 में नीदरलैंड के खिलाफ एफआईएच प्रो लीग मैच के दौरान यह मुकाम हासिल किया था। महिला वर्ग में यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह वंदना कटारिया के बाद दूसरी भारतीय खिलाड़ी हैं।
सविता लगातार तीन बार—2021, 2022 और 2023—गोलकीपर ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी हैं। इसके अलावा उन्हें 2018 में अर्जुन पुरस्कार और भीम अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।
इन बड़ी उपलब्धियों से भरा है सविता का करियर
2013 में सीनियर भारतीय महिला हॉकी टीम में डेब्यू किया। 2016 में भारतीय टीम को 36 साल बाद ओलंपिक में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। 2017 में भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान बनीं। 2018 में एशियन गेम्स में रजत पदक और वूमेंस एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में स्वर्ण पदक जीता। 2021 में टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन किया, टीम चौथे स्थान पर रही। 2022 में कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक और वूमेंस एफआईएच नेशंस कप में स्वर्ण पदक जीता। 2023 में एशियन गेम्स 2022 में कांस्य पदक (आयोजन 2023 में हुआ) जीता। 2024 में वूमेंस एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में स्वर्ण पदक जीता।
'अब ओलंपिक में गोल्ड लाना है लक्ष्य'
सविता ने कहा कि आगे टीम का लक्ष्य ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाना है और पूरी टीम इसकी तैयारी कर रही है। उन्होंने एफआईएच प्रो लीग को दुनिया की बेहतरीन टीमों के खिलाफ तैयारी के लिए सबसे बेहतर टूर्नामेंट बताया। आगामी महिला हॉकी वर्ल्ड कप को लेकर उन्होंने कहा, "हमारे पास सिल्वर और ब्रॉन्ज हैं, इस बार हमें गोल्ड के लिए जाना है।"
