https://www.choptaplus.in/

लखपति दीदी के रूप में रितु ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से बदली जिंदगी

 
लखपति दीदी के रूप में रितु ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से बदली जिंदगी

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में स्वयं सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हरियाणा के सिरसा जिले के नाथुसरी चौपटा ब्लॉक के गांव शाहपुरिया की रहने वाली रितु इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। कभी केवल सिलाई के काम पर निर्भर रहने वाली रितु आज अपना मनियारी व कपड़े का स्टोर संचालित कर रही हैं। स्वयं सहायता समूह से जुडऩे के बाद उन्होंने न केवल अपनी आजीविका को नया आधार दिया, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और अपने निर्णय स्वयं लेने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

मुख्य रूप से सिलाई का काम करती थी

रितु वर्ष 2019 में एकता महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थी। समूह से जुडऩे से पहले वह मुख्य रूप से सिलाई का काम करती थी। इसी दौरान उन्हें स्वयं सहायता समूह से जुडऩे के लिए प्रेरित किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित बचत, सामूहिक सहयोग और स्वरोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर मिला। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद रितु को आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। उन्हें शुरुआती तौर पर 10 हजार रुपये की राशि मिली। इसके बाद क्लस्टर संगठन से 50 हजार रुपये तथा बैंक से 20 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस वित्तीय सहयोग का उपयोग उन्होंने अपना मनियारी स्टोर शुरू करने में किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने व्यवसाय को व्यवस्थित किया और मनियारी के साथ कपड़ों की बिक्री भी शुरू की।

लखपति दीदी के रूप में रितु ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से बदली जिंदगी

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर हरविन्द कौर बनीं आत्मनिर्भर, कैंटीन से कमा रहीं 10 हजार रुपये मासिक

आज रितु की औसत वार्षिक आय करीब 2 लाख रुपये है। इस प्रकार उन्होंने स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आजीविका को मजबूत बनाया है और लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है।

स्वयं सहायता समूहों से जुडऩे और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं

रितु की सफलता केवल उनके व्यक्तिगत आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। वह दूसरी महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुडऩे और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग और सामूहिक प्रयासों का साथ मिले तो वे अपनी आजीविका मजबूत कर सकती हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।

उन्होंने कहा कि पहले वे केवल सिलाई का काम करती थी और जरूरत के समय आर्थिक सहयोग मिलना आसान नहीं था। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मुझे आगे बढ़ने का अवसर मिला। आज मेरा अपना मनियारी स्टोर है और दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हूं।

Rajasthan