सिरसा: 79 वर्षीय ज्ञान सिंह इन्सां ने मृत्यु के बाद भी की मानवता की सेवा, मेडिकल रिसर्च को दान किया शरीर
सिरसा। इंसानियत की सेवा का जज्बा यदि जीवन भर कायम रहे तो मृत्यु के बाद भी वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। ऐसा ही उदाहरण ब्लॉक कल्याण नगर की परमार्थ कॉलोनी निवासी 79 वर्षीय ज्ञान सिंह इन्सां ने पेश किया। उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए परिजनों ने उनकी पार्थिव देह मेडिकल शोध कार्यों के लिए दान कर मानवता की अनूठी मिसाल कायम की।
किसने दी शरीरदान की प्रेरणा?
ज्ञान सिंह इन्सां पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं से प्रेरित थे। उन्होंने गुरु से गुरुमंत्र की अनमोल दात प्राप्त की थी और डेरा सच्चा सौदा के समर्पित एवं अनथक सेवादारों में शामिल थे। डेरा सच्चा सौदा के संरक्षक संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां की प्रेरणा से ही यह शरीरदान अभियान चल रहा है।
कहां दान किया गया शरीर?
डेरा सच्चा सौदा की अमर सेवा मुहिम के तहत उनकी पार्थिव देह मेडिकल शोध कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश स्थित बापू आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, लाडनपुर (कोपागंज, मऊ) को दान की गई। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी लगातार मेडिकल कॉलेजों को शव दान कर रहे हैं।
कैसी रही अंतिम विदाई?
रविवार दोपहर 12 बजे सचखंड वासी के निवास स्थान पर अरदास का शब्द बोला गया। इसके पश्चात उनकी पार्थिव देह को फूलों से सजी एंबुलेंस में रखा गया तथा आवास से लेकर शाह मस्ताना जी-शाह सतनाम जी धाम, डेरा सच्चा सौदा सिरसा तक अंतिम विदाई यात्रा निकाली गई।

इस दौरान शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सेवादारों, परिजनों, रिश्तेदारों तथा साध-संगत ने "जब तक सूरज-चांद रहेगा, शरीर दानी ज्ञान सिंह इन्सां तेरा नाम रहेगा" तथा "शरीरदानी ज्ञान सिंह इन्सां अमर रहें" के गगनभेदी नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। बाद में "धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा" का इलाही नारा बोलकर एंबुलेंस को मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया गया।
क्यों खास थी यह विदाई?
अंतिम विदाई के दौरान डेरा सच्चा सौदा की "बेटा-बेटी एक समान" शिक्षा की सुंदर बानगी भी देखने को मिली। सचखंडवासी की पौत्रवधू मोनिका इन्सां, बाला देवी, पौत्र रविंद्र इन्सां सहित अन्य पारिवारिक सदस्यों ने अर्थी को कंधा देकर सामाजिक समानता का संदेश दिया। आमतौर पर अर्थी को केवल पुरुष ही कंधा देते हैं, लेकिन इस आयोजन में महिलाओं ने भी यह जिम्मेदारी निभाई।
क्या है डेरा सच्चा सौदा का शरीरदान अभियान?
डेरा सच्चा सौदा, सिरसा के अनुयायियों ने मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। अब तक डेरा के लगभग 2,500 अनुयायी शरीरदान कर चुके हैं। करीब 1.5 लाख लोगों ने अपने शरीर को दान करने का संकल्प लिया है। इसके अलावा अनुयायियों ने 18,000 से अधिक आंखों के जोड़े दान किए हैं और 57,000 किडनी दान के लिए संकल्पित हैं। यह अभियान इतना बड़ा हो गया है कि कुछ मेडिकल कॉलेजों के पास शवों की अधिकता हो गई है, जिससे अतिरिक्त शव उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड भेजे जा रहे हैं। रूढ़िवादी नेताओं का कहना है कि यह अभियान मृत्यु के बाद भूत-प्रेत जैसी अंधविश्वासों को खत्म करने में मदद कर रहा है।
परिजनों और समाज की प्रतिक्रिया
ज्ञान सिंह इन्सां अपने पीछे पुत्र गुलशन इन्सां, पुत्री कैलाश देवी तथा पौत्र रविंद्र इन्सां व चमन इन्सां सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए। इस अवसर पर परमार्थ कॉलोनी के प्रेमी सेवक साजन सेठी इन्सां, सच्ची प्रेमी समिति के सेवादार जसमेर इन्सां, अमन इन्सां, राजीव सपरा इन्सां, साध-संगत तथा अनेक रिश्तेदार उपस्थित रहे।
वार्ड नंबर 12 के पार्षद दीपक बंसल इन्सां ने ज्ञान सिंह इन्सां को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शरीर दान जैसा महान कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि ज्ञान सिंह इन्सां ने जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का संदेश दिया है
