हर महिने 25 लाख की बिक्री, 8 भैसों से शुरू किया था व्यवसाय, पढ़े-लिखे युवाओं के लिए मिसाल है गांव रूपावास के अक्षय जेवलिया की सक्सेस स्टोरी
हरियाणा के सिरसा जिले के गांव रूपावास के निवासी अक्षय कुमार जेवलिया ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो पारंपरिक पेशों में भी अपार सफलता पाई जा सकती है। एमएससी (गणित) पास अक्षय ने साल 2017 में केवल 8 पशुओं के साथ दूध व्यवसाय शुरू किया और आज उनके पास 350 से अधिक पशु हैं। इनमें से 180 भैंसें नियमित रूप से दूध देती हैं, जिनसे उन्हें प्रतिमाह 25 लाख रुपये से ज्यादा की बिक्री होती है।
नौकरी नहीं, रोजगार देना था सपना
अक्षय कुमार जेवलिया ने अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद सरकारी या निजी नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया। उनका सपना था "रोजगार पाने वाला नहीं, बल्कि देने वाला बनना"। उन्होंने अपने खेत में डेयरी फार्मिंग की नींव रखी और पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से शुरू किया।
साल 2017 से शुरू हुई यात्रा
जब अक्षय ने साल 2017 में 8 पशुओं से दूध उत्पादन शुरू किया था, तो उनके पास सीमित संसाधन थे। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और नवाचार और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को बढ़ाया। उन्होंने अपने पशुओं की देखभाल, आहार और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया।

आज 350 से अधिक पशु और 180 दूध देने वाली भैंसें
वर्तमान में अक्षय के पास कुल 350 से अधिक पशु हैं, जिनमें से 180 भैंसें रोजाना दूध देती हैं। इन भैंसों से प्रतिदिन करीब 1300 लीटर दूध उत्पादन होता है, जिसे वे सिरसा और आसपास के जिलों में बेचते हैं। उनका दूध स्थानीय बाजार के अलावा कई बड़े ब्रांड्स को भी सप्लाई होता है।
25 लाख रुपये प्रतिमाह की दूध बिक्री
अक्षय के डेयरी फार्म से हर महीने 25 लाख रुपये की दूध की बिक्री हो रही है। इसके अलावा वे दूध से बने उत्पादों जैसे घी और गोबर से बनी जैविक खाद का भी उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें अलग से अच्छी आय हो रही है। इस पूरे व्यवसाय में उनकी मासिक शुद्ध बचत भी लाखों में होती है।

15 लोगों को दे रहे हैं रोजगार
अपने इस सफल डेयरी फार्म के माध्यम से अक्षय ने 15 लोगों को स्थायी रोजगार भी उपलब्ध कराया है। इन कर्मचारियों को वे वेतन के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी देते हैं। वे कहते हैं कि "मेरे लिए सबसे बड़ा गर्व का विषय यही है कि मैंने केवल खुद का भविष्य नहीं संवारा, बल्कि औरों के लिए भी रोज़गार का जरिया बना।"
उत्कृष्ट दूध उत्पादन के लिए 8 भैंसों को मिला इनाम
अक्षय की मेहनत का असर उनके पशुओं पर भी साफ दिखता है। उनकी 8 भैंसें अब तक राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में सर्वाधिक दूध उत्पादन के लिए 11 बार इनाम जीत चुकी हैं। इससे उनके डेयरी फार्म की प्रतिष्ठा और भी बढ़ी है।
जैविक खाद से अतिरिक्त आय
दूध के व्यवसाय के साथ-साथ अक्षय गोबर से जैविक खाद और वर्मी कंपोस्ट भी तैयार करते हैं। यह खाद आस-पास के किसानों में काफी लोकप्रिय है। इससे उन्हें प्रति वर्ष अतिरिक्त लाखों की आय हो जाती है।
प्रेरणा स्रोत बने अक्षय कुमार
अक्षय कुमार जेवलिया की सफलता आज युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है उनका कहना है की “अगर आप पढ़े-लिखे हैं, तो खेती और पशुपालन को आधुनिक तरीके से अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।”अक्षय कुमार जेवलिया की कहानी यह दर्शाती है कि उच्च शिक्षा और पारंपरिक व्यवसायों का मेल भी सफलता की गारंटी बन सकता है। उन्होंने जिस तरह से सिर्फ 8 पशुओं से शुरुआत करके एक पूर्ण डेयरी इंडस्ट्री खड़ी की, वह सराहनीय है। उनकी कहानी उन हजारों युवाओं को दिशा दिखा सकती है जो बेरोजगारी से जूझ रहे हैं या सिर्फ सरकारी नौकरी के इंतजार में बैठे हैं।
