Sirsa News: जेल की महिला बंदियों को मिलेगा रोजगार, शुरू हुआ ब्यूटी पार्लर कोर्स
प्रशिक्षण कार्यक्रम के विस्तृत विवरण साझा करते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं डीएलएसए के सचिव प्रवेश सिंगला ने बताया कि यह विशेष कोर्स आगामी 35 दिनों तक जारी रहेगा। प्रशिक्षण के दौरान महिला बंदियों को न केवल ब्यूटी थेरेपी और कॉस्मेटोलॉजी के गुर सिखाए जाएंगे, बल्कि उन्हें व्यावसायिक प्रबंधन की बुनियादी जानकारी भी दी जाएगी। कोर्स पूरा होने के बाद सभी प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया जाएगा और सफल होने वाली महिला बंदियों को अधिकृत संस्थान की ओर से प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। इस प्रमाण पत्र की सहायता से वे अपनी सजा पूरी करने के बाद समाज में सम्मानजनक आजीविका कमाने में सक्षम हो सकेंगी।

आत्मनिर्भरता की ओर नई पहल
जेल प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकरण का संयुक्त प्रयास महिला बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। उद्घाटन सत्र के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने महिला बंदियों से संवाद करते हुए उन्हें इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कौशल विकास ही एकमात्र रास्ता है जिससे रिहाई के बाद महिला बंदी आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकती हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकती हैं। कारागार को केवल दंड का स्थान न मानकर सुधार गृह के रूप में विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रिहाई के बाद मिलेगा रोजगार
प्रशिक्षण सत्र के दौरान पीएनबी आरएसईटीआई के विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक सौंदर्य उपकरणों और तकनीकों का अभ्यास कराया जाएगा। इस अवसर पर जिला जेल अधीक्षक जसवंत सिंह और उप-अधीक्षक कुलदीप सिंह ने जेल परिसर में उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का निरीक्षण किया। पीएनबी आरएसईटीआई के कोऑर्डिनेटर दलबीर और प्रशिक्षक पूनम ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण के बाद महिला बंदियों में आत्मविश्वास की वृद्धि होगी। प्रशासन की योजना है कि भविष्य में अन्य व्यावसायिक कोर्स भी शुरू किए जाएं ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद पूर्व बंदियों को सामाजिक उपेक्षा का सामना न करना पड़े और उनके पास रोजगार के पर्याप्त अवसर मौजूद हों।
