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शाहपुरिया: 178 साल पुराना गांव, जहां देशभक्ति, धर्म और दान की परंपरा आज भी जीवित है

 
सिरसा जिले के ऐतिहासिक शाहपुरिया गांव का दृश्य, जहां से दर्जनों युवा भारतीय सेना और वायु सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं

सिरसा। जिले से 28 किलोमीटर दूर स्थित शाहपुरिया गांव अपनी 178 वर्ष पुरानी विरासत, देशभक्ति और आपसी भाईचारे के लिए पहचाना जाता है। वर्ष 1848 में राजस्थान से आए एक व्यक्ति द्वारा बसाए गए इस गांव ने देश सेवा में दर्जनों सैनिक दिए हैं। वर्तमान में 2782 की आबादी और 2086 मतदाताओं वाला यह गांव मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर निर्भर है।

'जाल की चक' से कैसे पड़ा शाहपुरिया नाम?

वर्तमान शाहपुरिया का क्षेत्र पहले 5000 बीघा में फैला एक बीहड़ था। यहां जाल के पेड़ होने के कारण इसे 'जाल की चक' कहा जाता था। यह जमीन पहले मोहब्‍बतपुर के बेनीवाल गोत्र के जाटों के पास थी, जो इसका कर (Tax) नहीं चुका पाए। वर्ष 1848 में राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के परलिका से आए चेतन राम सिहाग ने 75 रुपये का कर भरा और इस क्षेत्र को अपने अधिकार में ले लिया। उन्होंने सुरक्षा के लिए अपने रिश्तेदारों (सींवर गोत्र) को भी यहां बसा लिया। शुरुआत में इस जगह को सिहागपुड़िया कहा गया, जो समय के साथ बदलकर शाहपुरिया हो गया।

Shahpuria village Sirsa

आस्था का केंद्र है शाहपुरिया

गांव में स्थित प्राचीनहनुमान जी मंदिर, श्री भभूता सिद्ध महाराज, शेख फरीदऔरबाबा रामदेव जी के मंदिरश्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। यहां के लोग धर्म, पूजा-पाठ और सामाजिक मूल्यों में गहरी आस्था रखते हैं।

Shahpuria village Sirsa Temple

देश सेवा में हमेशा आगे

शाहपुरिया ने देश को अनेक वीर सैनिक दिए हैं। गांव के कई जवान भारतीय सेना, वायु सेना और बीएसएफ में सेवा दे चुके हैं या वर्तमान में देश की रक्षा कर रहे हैं।सेवानिवृत्त और सेवारत सैनिकों में सूबेदार जगमाल सिहाग, निहाल सिंह नई, भगवान सिंह राजपूत, अमर सिंह जांगड़ा, राजवीर सिंवर, सुभाष चंद्र जांगड़ा, भागीरथ जांगड़ा, कृष्ण कुमार (वायु सेना), अश्वनी कुमार, पवन कुमार, विकास कुमार, दिनेश कुमार (बीएसएफ) और नरेश कुमार जैसे नाम शामिल हैं।

स्वतंत्रता और विश्व युद्ध के वीर

गांव के श्री मोहर सिंह पूनिया और श्री माई लाल पूनिया ने द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेकर देश का नाम रोशन किया। उनकी वीरता आज भी गांव के युवाओं को प्रेरणा देती है।

दानवीरों ने बदली गांव की तस्वीर

शाहपुरिया के दानवीरों ने गांव के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

  • श्री जुगलाल पुत्र देवकर ने गांव के लिए पीने के पानी का कुआं बनवाया।
  • धर्मपाल, देवीलाल और दीपचंद सिंवर ने बस अड्डे का निर्माण करवाया।
  • धर्मपाल सिंवर ने मंदिर में एक कमरे का निर्माण करवाया।
  • गांववासियों के सहयोग से स्कूल में 5 कमरों का निर्माण किया गया।

Shahpuria village Sirsa

कृषि और पशुपालन है मुख्य आधार

लगभग2265 एकड़ रकबेमें फैला यह गांव मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। गांव मेंहेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, जलघर, राजकीय पशु अस्पताल, 3 जोहड़तथाराजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयजैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

शाहपुरिया सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि देशभक्ति, सामाजिक एकता, धर्म और विकास का ऐसा संगम है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।

शाहपुरिया के वीर सपूत: देश सेवा की गौरवशाली परंपरा

शाहपुरिया गांव ने हमेशा देश सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। गांव के अनेक वीर जवानों ने भारतीय सेना, वायु सेना और बीएसएफ में सेवाएं देकर गांव, क्षेत्र और देश का नाम रोशन किया है।

सेवानिवृत्त सैनिक

  •  श्री जगमाल सिहाग – सूबेदार, भारतीय थल सेना (सेवानिवृत्त)

  •  श्री निहाल सिंह नई – भारतीय थल सेना (सेवानिवृत्त)
  •  श्री भगवान सिंह राजपूत – भारतीय थल सेना (सेवानिवृत्त)
  •  श्री अमर सिंह जांगड़ा – हवलदार, भारतीय थल सेना (सेवानिवृत्त)
  •  श्री राजवीर सिंवर – भारतीय थल सेना (सेवानिवृत्त)
  •  श्री सुभाष चंद्र जांगड़ा – भारतीय थल सेना (सेवानिवृत्त)
  •  श्री भागीरथ जांगड़ा – भारतीय थल सेना (सेवानिवृत्त)

वर्तमान में देश सेवा कर रहे जवान

  •  श्री कृष्ण कुमार – JWO, भारतीय वायु सेना (सेवारत)
  •  श्री अश्वनी कुमार – EME, भारतीय थल सेना (सेवारत)
  •  श्री पवन कुमार – भारतीय थल सेना (सेवारत)
  •  श्री विकास कुमार – भारतीय थल सेना (सेवारत)
  •  श्री दिनेश कुमार – ASI, BSF (सेवारत)
  •  श्री नरेश कुमार – भारतीय थल सेना (सेवारत)

शाहपुरिया गांव को अपने इन वीर सपूतों पर गर्व है, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
 

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