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सिरसा वीटा प्लांट में किसानों के 15 करोड़ अटके, बीकेई ने सीएम को भेजा ज्ञापन

 
सिरसा वीटा मिल्क प्लांट में भुगतान अटकने के विरोध में प्रदर्शन करते किसान

सिरसा। जिलेभर के पशुपालकों और डेयरी किसानों का वीटा मिल्क प्लांट में करीब 15 करोड़ रुपये का भुगतान अटक गया है। दो माह से भुगतान न मिलने से किसानों में रोष है। भारतीय किसान एकता (बीकेई) के अध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख ने प्लांट अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा है।

दो माह से लंबित भुगतान, किसान परेशान

बीकेई अध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख ने बताया कि दूध संघ पशुपालकों के साथ लंबे समय से मनमानी कर रहा है। पिछले दो माह से किसानों को दूध का भुगतान नहीं किया गया है।

औलख ने आरोप लगाया कि बाजार में अन्य कंपनियों के दूध के रेट वीटा से काफी अधिक हैं, फिर भी दूध के दाम नहीं बढ़ाए जा रहे।  पहले भी किसान भुगतान को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। 

नकली दूध खरीदे जाने का आरोप

औलख ने सवाल उठाया कि प्लांट दूध की आवक 75 से 80 हजार लीटर प्रतिदिन बता रहा है, जबकि गर्मी के कारण 45 हजार लीटर से अधिक उत्पादन संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि 30 से 35 हजार लीटर नकली दूध वीटा मिल्क प्लांट के अधिकारियों की मिलीभगत से लिया जा रहा है।

आरोप है कि बीएमसी से मिल्क प्लांट तक दूध खरीद प्रक्रिया में मिलीभगत से मिलावटी और निम्न गुणवत्ता वाला दूध खरीदा जा रहा है। 

वीटा की साख को लेकर चिंता

औलख ने कहा कि रिकॉर्ड में दूध की गुणवत्ता बेहतर दिखाकर उसे अन्य दूध में मिलाया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और वीटा की साख प्रभावित हो रही है। 

किसान नेता ने यह भी आरोप लगाया कि रेगुलर और अनुभवी कर्मचारियों को उनके कार्य से हटाकर अन्य स्थानों पर बैठाया गया है। उनकी जगह अस्थायी कर्मचारियों से महत्वपूर्ण कार्य करवाए जा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। 

राजस्थान की दुग्ध समितियों से संबंधित दूध खरीद रिकॉर्ड और मिल्क ट्रैक शीट में कथित रूप से हेरफेर कर दुग्ध संघ को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग

बीकेई अध्यक्ष का आरोप है कि दूध, घी और अन्य दुग्ध उत्पादों की चोरी की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। वाहनों की मरम्मत और रखरखाव के नाम पर अनावश्यक खर्च दिखाकर प्लांट को आर्थिक क्षति पहुंचाई जा रही है।

औलख ने कहा कि सीईओ का नाम पूर्व में भी भ्रष्टाचार संबंधी मामलों में सामने आ चुका है। उन्होंने अनुचित नियुक्तियों और सभी भ्रष्टाचारों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बीकेई के अनुसार, भुगतान न मिलने के कारण पशुपालकों को मजबूरन अपना दूध निजी व्यापारियों को कम मूल्य पर बेचना पड़ता है, जिससे उन्हें आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है। 

सीईओ ने आरोपों को बताया निराधार

भुगतान में देरी के सवाल पर मेहता ने बताया कि दो किस्तें डाली जा चुकी हैं और एक किस्त दो दिन पहले डाली थी। उन्होंने कहा कि अब चार किस्तें पेंडिंग हैं और किसानों का करीब 15 करोड़ रुपये भुगतान बनता है।

मेहता ने बताया कि प्लांट का दूध मिड-डे मिल में जाता है, जिसका करीब 13 करोड़ रुपये आना बाकी है। पैसे आते ही भुगतान कर दिया जाएगा।

दूध की आवक और मिलावट के आरोपों पर मेहता ने कहा कि फिलहाल प्लांट में 60 से 65 हजार लीटर दूध आ रहा है और दूध की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी प्लांट के रेट बराबर हैं और अगर रेट बढ़ेंगे तो सभी के बढ़ेंगे। 
 

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