अब किसानों के मिलेगा उत्तम बीज, राजस्थान में पहला ऑटोमेटिक सीड प्लांट, 7 मशीनों से होगी बीजों की सफाई और छंटाई
राजस्थान में किसानों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने की दिशा में कोटा कृषि विश्वविद्यालय में ऑटोमेटिक सीड प्लांट स्थापित किया जाएगा। परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है। पहले चरण में प्लांट में करीब 7 अत्याधुनिक मशीनें लगाए जाने की योजना है। इनकी मदद से बीजों की सफाई, छंटाई और आगे की प्रोसेसिंग का काम आधुनिक तरीके से किया जाएगा। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार मशीनें बीजों की रंग और आकार जैसी विशेषताओं के आधार पर छंटाई में मदद करेंगी।
कोटा कृषि विश्वविद्यालय में बनेगा प्लांट
यह प्लांट कोटा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य बीज प्रसंस्करण की मौजूदा व्यवस्था को आधुनिक बनाना और किसानों के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले उन्नत एवं प्रमाणित बीजों की उपलब्धता को मजबूत करना है।
दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की ओर से परियोजना के लिए करीब 9 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। परियोजना में मशीनरी के साथ प्लांट के लिए आवश्यक भवन और अन्य आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बीज की सफाई से पैकेजिंग तक होगी प्रक्रिया
ऑटोमेटिक प्लांट में बीजों की प्रक्रिया कई चरणों में होगी। सबसे पहले बीजों से धूल, मिट्टी, भूसा, छोटे कंकड़-पत्थर और अन्य अवांछित सामग्री को अलग करने की प्रक्रिया होगी। इसके बाद बीजों की गुणवत्ता के आधार पर छंटाई की जाएगी।
प्रक्रिया के अंतिम चरणों में तैयार बीजों की पैकेजिंग भी मशीनों के जरिए किए जाने की योजना है। स्वचालित व्यवस्था का उद्देश्य बीज प्रसंस्करण को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
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कलर सॉर्टिंग तकनीक से होगी बीजों की छंटाई
प्लांट की प्रमुख तकनीकों में कलर सॉर्टिंग शामिल होगी। इस तकनीक की मदद से बीजों के रंग और निर्धारित विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग श्रेणी के दानों की पहचान और छंटाई की जा सकती है।
इससे ऐसे दानों को अलग करने में मदद मिलेगी जिनका रंग या आकार सामान्य बीज से अलग है। बीजों की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है।
गेहूं, सोयाबीन और दलहन के बीजों पर फोकस
दी गई जानकारी के अनुसार, प्लांट में गेहूं, सोयाबीन, चना, सरसों और अन्य दलहनी फसलों के बीजों की प्रोसेसिंग की जा सकती है।
हाड़ौती क्षेत्र में सोयाबीन, गेहूं, चना और सरसों प्रमुख फसलों में शामिल हैं। ऐसे में कोटा में आधुनिक बीज प्रसंस्करण सुविधा विकसित होने से इस क्षेत्र में बीजों की प्रोसेसिंग और उपलब्धता की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हाड़ौती के किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है प्लांट?
हाड़ौती क्षेत्र में कोटा के अलावा बूंदी, बारां और झालावाड़ जिले शामिल हैं। क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान विभिन्न फसलों की खेती करते हैं।
स्थानीय स्तर पर आधुनिक बीज प्रसंस्करण सुविधा होने से बीजों की सफाई, छंटाई और पैकेजिंग के लिए एक आधुनिक व्यवस्था उपलब्ध होगी। इससे प्रमाणित और उन्नत बीजों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
बीज की गुणवत्ता पर पड़ेगा जोर
फसल उत्पादन में गुणवत्तापूर्ण बीज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बीज प्रसंस्करण के दौरान अवांछित और खराब दानों को अलग करने से तैयार बीज की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस प्लांट के शुरू होने से किसानों की पैदावार या मंडी में मिलने वाले दाम में निश्चित बढ़ोतरी होगी, ऐसा दावा उपलब्ध जानकारी से प्रमाणित नहीं होता। इसका वास्तविक प्रभाव प्लांट के संचालन, तैयार बीज की गुणवत्ता, उपलब्धता और किसानों तक उसकी पहुंच के बाद ही स्पष्ट होगा।
राजस्थान में बीज प्रसंस्करण को मिलेगा आधुनिक आधार
कोटा में प्रस्तावित ऑटोमेटिक सीड प्लांट राजस्थान में बीज प्रसंस्करण को आधुनिक तकनीक से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। स्वचालित सफाई, छंटाई, कलर सॉर्टिंग और पैकेजिंग जैसी प्रक्रियाओं से बीज तैयार करने की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा।
किसानों के लिए इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाड़ौती जैसे प्रमुख कृषि क्षेत्र में उन्नत और प्रमाणित बीजों की प्रसंस्करण एवं उपलब्धता की व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

