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हरियाणा में आयुष्मान योजना के प्राइवेट अस्पतालों ने दी सेवाएं बंद की चेतावनी, वजह हैरान करने वाली

हरियाणा के 600 निजी अस्पतालों का 500 करोड़ रुपये का बकाया सरकार पर लंबित है। IMA ने आज सोमवार रात ऑनलाइन बैठक में तय किया कि ठोस आश्वासन नहीं मिला तो 1.60 करोड़ आयुष्मान कार्डधारकों का इलाज बंद किया जाएगा। CM फ्लाइंग की जांच ने तनाव और बढ़ा दिया।
 
IMA Haryana doctors and private hospital representatives at press conference warning to stop Ayushman Yojana Haryana services over 500 crore pending payment

हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना पर गहरा संकट मंडरा रहा है और आज 20 अप्रैल इस पूरे विवाद की अहम तारीख बन गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) हरियाणा ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य संरक्षण प्राधिकरण के सीईओ को पत्र भेजकर साफ चेतावनी दी है कि अगर 500 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान नहीं हुआ और ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो प्रदेश के निजी अस्पताल इस योजना के तहत इलाज देना बंद कर देंगे। IMA के चेयरमैन डॉ. अजय महाजन ने बताया कि प्रदेश की पूरी टीम सोमवार रात ऑनलाइन बैठक करके यह तय करेगी कि आगे क्या कदम उठाया जाए।

प्रदेश के 600 निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना के तहत किए गए इलाज के एवज में सरकार की ओर से लगभग 500 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। अस्पतालों का कहना है कि योजना के तहत 15 दिन में भुगतान का प्रावधान है, लेकिन सितंबर 2025 से ही करोड़ों रुपये के बिल लंबित पड़े हैं। 7 अप्रैल को हुई ऑनलाइन बैठक में राज्यभर के अस्पतालों ने अपने सरेंडर लेटर IMA हरियाणा अध्यक्ष को सौंपने का निर्णय लिया था।

CM फ्लाइंग की जांच ने मचाया हड़कंप — भुगतान के बदले आई जांच टीम

इस पूरे मामले में एक हैरान करने वाला मोड़ यह आया कि IMA के पत्र और मांगों के बाद आयुष्मान योजना के सीईओ सतबीर मान ने चार दिन पहले IMA के साथ बैठक की थी और जल्द भुगतान का आश्वासन दिया था। लेकिन उस आश्वासन के बदले पिछले शुक्रवार को CM फ्लाइंग की टीमें कई निजी अस्पतालों में पहुंच गईं और आयुष्मान योजना के तहत किए गए इलाज की फाइलों की जांच शुरू कर दी। IMA से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि जांच के नाम पर निजी अस्पतालों पर दबाव बनाया जा रहा है।

IMA हरियाणा का आरोप है कि जनवरी 2025 में खुद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि IMA के प्रतिनिधियों को 'एम्पैनलमेंट और ग्रीवेंस कमेटी' में जगह दी जाए, लेकिन अधिकारियों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। पिछले पांच महीनों से इन कमेटियों की कोई बैठक नहीं हुई है। Jagmarg IMA के पदाधिकारियों ने यह माना कि कुछ अस्पतालों ने गड़बड़झाला किया होगा, लेकिन उनकी मांग है कि प्रमाण के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो, न कि सभी ईमानदार निजी अस्पतालों को एक ही नजर से देखा जाए।

2024 और 2025 की हड़तालों के बाद भी नहीं सुधरे हालात — 1.60 करोड़ मरीजों पर संकट

यह पहली बार नहीं है जब IMA ने इस तरह का कदम उठाया है। IMA ने 2024 में अप्रैल और अगस्त में तीन-तीन हड़तालें की थीं। अगस्त 2025 में भी IMA ने लगातार 18 दिनों तक हड़ताल की थी। हर बार सरकार ने आश्वासन दिया और हर बार भुगतान का मामला अटका ही रहा।

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प्रदेश में लगभग 1.60 करोड़ आयुष्मान कार्डधारक हैं। अकेले फरीदाबाद में ही करीब 10 लाख आयुष्मान कार्डधारक हैं, जबकि गुरुग्राम, करनाल, हिसार, सोनीपत, पलवल और रेवाड़ी में भी लाखों कार्डधारक निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं। अगर अस्पतालों ने सेवाएं बंद कीं, तो इसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ेगा जो इस योजना के तहत मुफ्त इलाज पर निर्भर हैं। आयुष्मान योजना के सीईओ सतबीर मान से बार-बार मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। IMA चेयरमैन डॉ. अजय महाजन ने कहा कि अगर रात की बैठक में भुगतान पर ठोस आश्वासन मिला तो सेवाएं जारी रहेंगी, नहीं तो इलाज बंद की घोषणा जल्द होगी।
 

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