हरियाणा में अब लाल डोरा विवादों का निपटारा करेंगे तहसीलदार और डीआरओ
हरियाणा में लाल डोरा आबादी के तहत संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर चल रहे पारिवारिक विवादों की सुनवाई अब पंचायत विभाग नहीं करेगा। पंचायत विभाग के निदेशक ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि इन विवादों का निपटारा अब राजस्व विभाग के अधिकारी यानी तहसीलदार और जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) करेंगे। स्वामित्व योजना के लागू होने के बाद प्रदेश भर के गांवों में संपत्ति विवाद के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
लाल डोरा के भीतर स्थित संपत्तियों की रजिस्ट्री होने के बाद कई परिवारों में मालिकाना हक को लेकर नई आपत्तियां सामने आ रही थीं। मुख्य रूप से ऐसे मामले बढ़े हैं जहां परिवार के किसी एक सदस्य ने पूरी पुश्तैनी संपत्ति की रजिस्ट्री केवल अपने नाम करवा ली और अन्य हिस्सेदारों को उनके अधिकार से वंचित कर दिया। अब तक इन शिकायतों की सुनवाई पंचायत विभाग के जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी (डीडीपीओ) और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) द्वारा की जा रही थी। नए निर्देशों के तहत पंचायत विभाग के अधिकारियों को इन मामलों की सुनवाई करने से रोक दिया गया है।
राजस्व विभाग को सौंपी जिम्मेदारी
सरकार के इस फैसले से राजस्व विभाग का दायरा और जिम्मेदारी बढ़ गई है। स्वामित्व योजना के तहत सरकार ने लाल डोरा के निवासियों को मालिकाना हक देकर उनकी संपत्तियों की मात्र 170 रुपये के शुल्क पर तहसील कार्यालयों से रजिस्ट्री करवाई थी। पंचायत विभाग का तर्क है कि चूंकि संपत्ति के पंजीकरण का मुख्य कार्य राजस्व विभाग द्वारा किया गया है, इसलिए इससे जुड़े कानूनी और पारिवारिक विवादों का तकनीकी समाधान भी उसी विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। पंचायत निदेशक ने उपायुक्तों के माध्यम से सभी संबंधित अधिकारियों को इस नई व्यवस्था के बारे में सूचित कर दिया है।
एसओपी जारी होने का इंतजार
पंचायत विभाग से निर्देश प्राप्त होने के बाद राजस्व अधिकारियों ने नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुनवाई प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू होने में अभी कुछ समय लगेगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, लाल डोरा विवादों की सुनवाई की स्पष्ट रूपरेखा तय करने के लिए राज्य सरकार की ओर से मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का इंतजार किया जा रहा है। एसओपी जारी होते ही तहसीलदार और डीआरओ स्तर पर लंबित पारिवारिक शिकायतों का निपटारा तेज गति से किया जाएगा, जिससे मालिकाना हक के लिए भटक रहे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी।
