हरियाणा में पंचायत जमीन के नियम सख्त: शामलात जमीन से रास्ता देने के लिए अब लेनी होगी पूरे गांव की मंजूरी
चंडीगढ़: प्रदेश की शामलात और पंचायत जमीनों पर अब निजी कंपनियों या प्रोजेक्ट्स की मनमानी नहीं चलेगी। हरियाणा सरकार ने प्राइवेट परियोजनाओं को पंचायत की जमीन से रास्ता देने के नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया हैं। नई व्यवस्था के अनुसार अब किसी भी निजी प्रोजेक्ट को रास्ता देने के लिए पूरे गांव की सहमति लेनी होगी, केवल सरपंच या कुछ पंचों की मर्जी से जमीन नही दी जा सकेगी।
नई नीति के अनुसार, पंचायत की जमीन से रास्ता देने के प्रस्ताव पर ग्राम पंचायत के कम से कम तीन-चौथाई (75 प्रतिशत) सदस्यों के हस्ताक्षर जरूरी है। इसके बाद ग्राम सभा के दो-तिहाई सदस्यों की लिखित सहमति भी अनिवार्य होगी। सरकार ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि रास्ता देने के एवज में पंचायत की जमीन न तो बेची जाएगी और न ही उसे लीज या कर्ज पर दिया जा सकेगा।
जमीन का मालिकाना हक हर हाल में ग्राम पंचायत के पास ही सुरक्षित रहेगा। इसके साथ ही एक बड़ी शर्त यह भी जोड़ी गई है कि पंचायत की जमीन से जो रास्ता निजी प्रोजेक्ट को दिया जाएगा, उसका इस्तेमाल आम ग्रामीण भी बेरोकटोक कर सकेंगे। यानी निजी कंपनियां उस रास्ते पर अपना कोई स्थायी एकाधिकार या कब्जा नहीं जमा सकेंगी, जिससे गांव वालों को आवागमन में कोई परेशानी न हो।
सरकार की इस सख्ती के बीच कुछ जगहों से जमीन विनिमय (लैंड एक्सचेंज) के प्रस्ताव भी आने लगे हैं। उदाहरण के लिए पानीपत जिले के सनौली खुर्द गांव की पंचायत ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए एक प्रस्ताव सरकार को भेजा है। इसमें पंचायत अपनी 9 कनाल 3 मरला जमीन के बदले निजी कंपनी से करोड़ों रुपये की कीमत वाली 15 कनाल जमीन लेने को तैयार है। इस नई नीति से पंचायत के फैसलों में पूरी पारदर्शिता आएगी और ग्रामीण हितों की अनदेखी पर रोक लगेगी।
