Noida Protest Reason: क्यों सुलग उठा नोएडा? हरियाणा और यूपी के वेतन का वो अंतर जिसने मचाया बवाल
नोएडा/ (चोपटा प्लस): दिल्ली-एनसीआर के सबसे बड़े औद्योगिक हब नोएडा में फैक्ट्री श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन अब उग्र रूप ले चुका है। लगातार बढ़ते इस 'नोएडा प्रोटेस्ट' (Noida Protest) का मुख्य कारण उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्य हरियाणा के न्यूनतम वेतन में भारी अंतर बताया जा रहा है। नोएडा के फेज-2 और सेक्टर 59 से 63 तक के औद्योगिक क्षेत्रों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिसका सीधा असर दिल्ली-एनसीआर के ट्रैफिक और हरियाणा से आने-जाने वाले कामगारों पर पड़ रहा है।
क्या है नोएडा प्रोटेस्ट का मुख्य कारण? (Noida Protest Reason)
प्रदर्शनकारी श्रमिकों के गुस्से का मुख्य केंद्र 'वेज गैप' (वेतन का अंतर) है। श्रमिकों का तर्क है कि जब पड़ोसी राज्य हरियाणा सरकार ने हाल ही में औद्योगिक कामगारों का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 14,000 से 19,000 रुपये तक कर दिया है, तो यूपी (नोएडा) में आज भी उन्हें मात्र 13,000 से 14,000 रुपये क्यों दिए जा रहे हैं?
इसी असमानता के खिलाफ श्रमिक अब न्यूनतम 20,000 रुपये मासिक वेतन और 8-घंटे की शिफ्ट की मांग पर अड़ गए हैं। इसके अलावा, नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) न देना, साप्ताहिक अवकाश की कमी और महिला सुरक्षा के लिए कमेटियों का न होना भी इस विवाद की बड़ी वजह है।
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सड़कों पर आगजनी, आरएएफ (RAF) तैनात
वेतन की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विरोध अब हिंसा में बदल चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ औद्योगिक परिसरों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं। हालात को बेकाबू होता देख नोएडा पुलिस ने भारी पुलिस बल के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को तैनात कर दिया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस और वाटर कैनन का भी इस्तेमाल करना पड़ा है। प्रशासन ने उद्योगपतियों के साथ आपात बैठक बुलाकर श्रम-कानूनों के पालन का निर्देश दिया है।
हरियाणा के कामगारों और ट्रैफिक पर पड़ा सीधा असर
इस प्रदर्शन ने दिल्ली-NCR की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। नोएडा-दिल्ली लिंक रोड और DND एक्सप्रेसवे पर घंटों तक भारी जाम की स्थिति बनी रही। फरीदाबाद, गुरुग्राम और पलवल जैसे हरियाणा के इलाकों से नोएडा में काम करने आने वाले हजारों लोग इस जाम से सीधे प्रभावित हुए हैं।
इस प्रदर्शन ने हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में भी एक नई चर्चा छेड़ दी है कि कैसे हरियाणा का वेतन वृद्धि मॉडल अब दूसरे राज्यों के श्रमिकों के लिए एक उदाहरण बन रहा है।
