ग्वार-नरमा में जड़-गलन का खतरा, सिंचाई के बाद पौधे पीले होकर सूखें तो रहें सतर्क; वैज्ञानिक ने बताया बचाव

 

सिरसा। ग्वार और नरमा की फसल में सिंचाई के बाद पौधे पीले पड़कर सूखने लगें तो किसान इसे केवल पानी या खाद की कमी मानकर नजरअंदाज न करें। यह जड़-गलन रोग का संकेत भी हो सकता है। यह रोग मिट्टी में मौजूद फफूंद के कारण हो सकता है और जड़ों को नुकसान पहुंचने के बाद पौधे को पानी और पोषक तत्व मिलने में बाधा आती है।

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कीट विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. आरके सैनी ने किसानों को जड़-गलन से बचाव के लिए बुवाई से पहले बीज उपचार अपनाने की सलाह दी है। इससे पहले भी डॉ. सैनी ग्वार के उखेड़ा यानी जड़-गलन रोग में बीज उपचार को महत्वपूर्ण बता चुके हैं।

डॉ. सैनी सिरसा के ऐलनाबाद खंड के गांव चिलकनी ढाब में आयोजित कृषि जागरूकता शिविर में किसानों के ग्वार और नरमा से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे। शिविर का आयोजन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ऐलनाबाद और हिन्दुस्तान गम एंड केमिकल्स, भिवानी की ओर से संयुक्त रूप से किया गया।

जड़-गलन रोग में पौधे के साथ क्या होता है?

डॉ. सैनी के अनुसार जड़-गलन मुख्य रूप से मिट्टी में मौजूद फफूंद के प्रकोप से होता है। खेत में अनुकूल नमी मिलने पर फफूंद सक्रिय होकर पौधों की जड़ों पर हमला कर सकती है।

जड़ें प्रभावित होने के बाद पौधे को पर्याप्त पानी और पोषक तत्व मिलने में बाधा आती है। इसके बाद पौधा कमजोर होने लगता है और पत्तियां पीली पड़ने के साथ पौधा धीरे-धीरे सूख सकता है।

ग्वार में जड़-गलन को उखेड़ा रोग के नाम से भी जाना जाता है। डॉ. सैनी की इससे पहले प्रकाशित किसान सलाह में भी इस रोग को मिट्टी में रहने वाली फफूंद से जोड़ा गया है।

सिंचाई के बाद पौधे सूखें तो क्या जड़-गलन ही है?

यह किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है। पौधे के पीले पड़ने या सूखने के पीछे जड़-गलन के अलावा पानी की अधिकता या कमी, पोषक तत्वों की समस्या और दूसरे रोग भी हो सकते हैं।

इसलिए केवल पौधा सूखता देखकर अपनी तरफ से फफूंदनाशक का इस्तेमाल शुरू नहीं करना चाहिए। प्रभावित पौधे की जड़ों की स्थिति देखें और संदेह होने पर स्थानीय कृषि अधिकारी या कृषि विशेषज्ञ से रोग की पुष्टि कराएं।

जड़-गलन से बचाव में बीज उपचार क्यों जरूरी?

डॉ. सैनी ने किसानों को बुवाई से पहले बीज उपचार अपनाने की सलाह दी है। उनके अनुसार कार्बेन्डाजिम नामक फफूंदनाशक से बीज उपचार जड़-गलन के प्रबंधन में मदद कर सकता है।

बीज उपचार का उद्देश्य फसल के शुरुआती चरण में मिट्टी से फैलने वाले रोगों के खतरे को कम करना है। ग्वार में जड़-गलन को लेकर डॉ. सैनी की पूर्व सलाह में भी बुवाई से पहले कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत से बीज उपचार का उल्लेख मिलता है।

हालांकि चिलकनी ढाब के शिविर से उपलब्ध जानकारी में प्रति किलो बीज दवा की मात्रा नहीं बताई गई है। इसलिए किसान अपनी तरफ से मात्रा तय करने के बजाय फसल और उत्पाद के अनुसार कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की वर्तमान सिफारिश लेकर ही बीज उपचार करें।

खड़ी फसल में जड़-गलन दिखाई दे तो क्या करें?

बीज उपचार मुख्य रूप से बुवाई से पहले बचाव का तरीका है। अगर खड़ी फसल में पौधे पहले ही पीले पड़ने या सूखने लगे हैं तो स्थिति अलग है।

ऐसे में किसान सबसे पहले यह पता लगाएं कि समस्या वास्तव में जड़-गलन की है या किसी दूसरे कारण से पौधे प्रभावित हुए हैं। रोग की पहचान होने के बाद ही कृषि विशेषज्ञ से वर्तमान उपचार की जानकारी लेकर फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें।

बीज उपचार में इस्तेमाल होने वाली मात्रा को खड़ी फसल के उपचार की मात्रा न समझें। दोनों के इस्तेमाल का तरीका अलग हो सकता है।

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किसान इन लक्षणों पर रखें नजर

खेत में क्या दिख रहा है? किसान क्या करें?
पौधा पीला पड़ रहा है कारण की जांच करें, केवल खाद की कमी न मानें
सिंचाई के बाद पौधे सूख रहे हैं जड़ों की स्थिति भी जांचें
जड़ें गलती/क्षतिग्रस्त दिखें कृषि विशेषज्ञ से रोग की पुष्टि कराएं
बुवाई की तैयारी कर रहे हैं अनुशंसित बीज उपचार की जानकारी लें
दवा की मात्रा पता नहीं अनुमान से दवा न डालें
कई पौधे लगातार प्रभावित हो रहे हैं स्थानीय कृषि अधिकारी को खेत दिखाएं

क्या ग्वार और नरमा दोनों में एक ही दवा और मात्रा इस्तेमाल करें?

शिविर में किसानों को ग्वार और नरमा को नुकसान पहुंचाने वाले विभिन्न रोगों और कीटों की जानकारी दी गई, लेकिन फसल, रोग की स्थिति और इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद के अनुसार सिफारिश अलग हो सकती है।

इसलिए ग्वार के लिए बताई गई किसी दवा या मात्रा को बिना पुष्टि नरमा में और नरमा की सलाह को ग्वार में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

खेत की उपजाऊ शक्ति के लिए जैविक खाद पर जोर

शिविर में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. जगदेव सिंह ने किसानों को जमीन की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने के लिए जैविक खाद का अधिक इस्तेमाल करने की सलाह दी।

किसानों को ग्वार और नरमा में लगने वाले दूसरे प्रमुख कीटों और बीमारियों के प्रबंधन की जानकारी भी दी गई।

कृषि योजनाओं का लाभ चाहिए तो किसान ID भी बनवाएं

कृषि विभाग के कृषि सुपरवाइजर साहिल कुमार ने किसानों से किसान पहचान कार्ड जल्द बनवाने का आग्रह किया। उन्होंने किसानों को विभाग की विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी भी दी।

यह जड़-गलन रोग के उपचार का हिस्सा नहीं है, लेकिन कृषि विभाग भविष्य में विभिन्न सेवाओं और योजनाओं को किसान पहचान से जोड़ रहा है। इसलिए किसानों को अपनी किसान ID संबंधी प्रक्रिया भी समय रहते पूरी करने की सलाह दी गई।

चिलकनी ढाब में आयोजित इस कृषि जागरूकता शिविर में करीब 50 किसानों ने भाग लिया।

किसान के लिए सबसे जरूरी बात

ग्वार या नरमा में सिंचाई के बाद पौधे पीले पड़कर सूखने लगें तो तुरंत कोई भी दवा डालना सही तरीका नहीं है। पहले समस्या की पहचान करें। अगर जड़-गलन की पुष्टि होती है तो कृषि विशेषज्ञ की मौजूदा सिफारिश के अनुसार उपचार करें।

अगली बुवाई के समय बीज उपचार को नजरअंदाज न करना जड़-गलन जैसे मिट्टी से फैलने वाले रोगों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण हो सकता है।