हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढने वाले बच्चों को मिलेगी 1000 रुपये, सीधे बैंक खाते में आएगी रकम
चंडीगढ़: हरियाणा में जमीनी स्तर पर शिक्षा को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपना एक और बड़ा चुनावी वादा पूरा कर दिया है। प्रदेश सरकार अब सरकारी स्कूलों की बाल वाटिकाओं (प्री-नर्सरी) में दाखिला लेने वाले करीब एक लाख बच्चों को 'स्टार्टअप किट' के लिए 1-1 हजार रुपये की आर्थिक मदद देगी। हालिया बजट सत्र में की गई इस घोषणा को नए शैक्षणिक सत्र से लागू करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
सरकार की इस शानदार पहल का सीधा मकसद गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही निजी स्कूलों जैसी बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ेगा और बच्चों की शुरुआती नींव मजबूत होगी।
खाते में आएंगे सीधे पैसे, 800 रुपये वर्दी और 200 किताबों के लिए
शिक्षा विभाग ने इन 1000 रुपये की सहायता राशि को बांटने का पूरा खाका तैयार कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, बच्चों को स्कूल की वर्दी खरीदने के लिए 800 रुपये दिए जाएंगे, जबकि बाकी 200 रुपये स्कूल बैग, बुनियादी किताबों और कॉपियों खरीदने के लिए निर्धारित किए गए हैं।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पैसा किसी स्कूल प्रबंधन या ठेकेदार के हाथ में नहीं जाएगा। पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह राशि 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (डीबीटी) के जरिए सीधे बच्चों या उनके अभिभावकों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। इससे अभिभावक अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से बच्चों के लिए सामान खरीद सकेंगे।
नए सत्र से मिलेगी योजना की सौगात, आगे भी रहेगा जारी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह फैसला सिर्फ इसी सत्र के लिए नहीं है, बल्कि भविष्य में भी जो बच्चे बाल वाटिका में दाखिला लेंगे, वे इस आर्थिक मदद के पूरे हकदार होंगे। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि इस कदम से सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी स्तर पर दाखिलों की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां कई बार अभिभावक बच्चों की शुरुआती पढ़ाई के खर्च को लेकर चिंता में रहते हैं, उनके लिए सरकार की यह योजना किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। अब गरीब परिवारों के बच्चों को भी शुरुआत से ही पढ़ाई का बेहतर माहौल और संसाधन मिल सकेंगे।
शिक्षा विभाग ने कसी कमर, बच्चों का डेटा जुटाने का काम शुरू
इस अहम योजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रदेश भर की बाल वाटिकाओं में पढ़ने वाले बच्चों का पूरा डेटा और उनके बैंक अकाउंट की जानकारी तेजी से जुटाई जा रही है।
विभाग का लक्ष्य है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही बिना किसी देरी के 10 करोड़ रुपये की यह कुल राशि बच्चों के खातों में ट्रांसफर कर दी जाए। शिक्षाविदों का मानना है कि हरियाणा सरकार की यह बाल वाटिका नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के उस विजन को पूरी तरह सार्थक करती है, जिसमें शुरुआती बचपन की देखभाल और शिक्षा पर सबसे अधिक जोर दिया गया है।