सिरसा में पंचायती तालाबों को पट्टे पर लेकर मछली पालन करने पर 40 हजार सब्सिडी देगी सरकार
हरियाणा के मत्स्य पालन विभाग ने अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से संबंधित पट्टेदारों को पंचायती तालाबों और सरकारी जलाशयों की लीज राशि पर सब्सिडी देने की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पहले साल की लीज राशि पर तो सहायता दी ही जाती है, साथ ही दूसरे से पांचवें वर्ष की लीज़ राशि पर भी सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र का कहना है कि इस योजना से पट्टेदारों की कार्यक्षमता में विस्तार होगा और अतिरिक्त वित्तीय मदद मिलने से मत्स्य पालन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
दूसरे से पांचवें वर्ष तक कितनी मिलेगी सब्सिडी?
हरियाणा मत्स्य पालन विभाग की ओर से अनुसूचित जाति वर्ग के पट्टेदारों को दूसरे वर्ष से लेकर पांचवें वर्ष तक की लीज राशि पर सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत लाभार्थी को 40 प्रतिशत वास्तविक लीज राशि या 40,000 रुपए प्रति हेक्टेयर, जो भी कम हो, अनुदान के रूप में दिया जाएगा। यह सब्सिडी अधिकतम चार हेक्टेयर तक ही दी जाएगी। यह अनुदान केवल पंचायती तालाबों और सरकारी जलाशयों पर ही लागू होता है।
पहले साल की लीज राशि पर कितनी सहायता?
अनुसूचित जाति के मछली पालकों को पहले साल की लीज राशि पर 50 प्रतिशत या 50,000 रुपए प्रति हेक्टेयर, जो भी कम हो, सब्सिडी दी जाती है। यह सहायता भी अधिकतम चार हेक्टेयर तक ही सीमित है और केवल पंचायती तालाबों व सरकारी जलाशयों पर ही लागू होती है।
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नदियों और नहरों के पट्टेदारों को क्या मिलेगा?
अधिसूचित जलक्षेत्रों, नदियों, नालों और नहरों की बोली के बाद सफल बोलीदाता-पट्टेदार को अधिकतम पांच लाख रुपए तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा। यह उन पट्टेदारों के लिए एक बड़ी राहत है जो नदियों और नहरों में मछली पालन करते हैं।
योजना का लाभ लेने के लिए क्या शर्तें हैं?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें रखी गई हैं:
- परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है
- आवेदक हरियाणा राज्य का स्थाई निवासी होना चाहिए
- आवेदक अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित होना चाहिए
- आवेदक की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए
- आवेदक किसी भी सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्था में कार्यरत नहीं होना चाहिए
- अनुदान द्वितीय वर्ष से 5 वर्ष तक ही प्रदान किया जाएगा
- अधिकतम चार हेक्टेयर तक ही अनुदान दिया जाएगा
आवेदन के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को ये दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे:
- मत्स्य पालक और विभाग के बीच हुए अनुबंध पत्र की प्रति
- मत्स्य पालक और पंचायत के बीच हुए अनुबंध पत्र
- जन्मतिथि और पहचान का प्रमाण पत्र
- जाति प्रमाण पत्र
- किसी सरकारी संस्थान से मत्स्य प्रशिक्षण से संबंधित प्रमाण पत्र
- भूमि का रिकार्ड (पंचायत का प्रस्ताव दस्तावेज और पट्टा रसीद)
- राजकीय/राष्ट्रीय मत्स्य बीज फार्म से मत्स्य बीज की खरीद की रसीद या वाउचर
- तालाब से संबंधित फोटो
आवेदन कहाँ और कैसे करें?
इच्छुक लाभार्थी जिले के मत्स्य पालन विभाग के कार्यालय से संपर्क कर योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। विभाग की ओर से आवेदन के लिए सरल हरियाणा पोर्टल (saralharyana.gov.in) का भी उपयोग किया जा रहा है। आवेदक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति के मछली पालकों को रोजगार के अवसर प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार का मानना है कि लीज राशि पर सब्सिडी मिलने से पट्टेदारों की वित्तीय बोझ कम होगी और वे अपने व्यवसाय को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा सकेंगे। जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र के अनुसार, यह योजना मत्स्य पालकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहायक साबित हो सकती है।
मछली पालन के लिए और क्या सहायता मिलती है?
हरियाणा मत्स्य पालन विभाग मछली पालकों को कई अन्य प्रकार की वित्तीय और तकनीकी सहायता भी प्रदान करता है। इनमें गहन मत्स्य विकास योजना के तहत मछली बीज पर सब्सिडी, मछली पालन के लिए ऋण में सहायता, प्रशिक्षण और रिफ्रेशर कोर्स की व्यवस्था, तालाबों की मिट्टी और पानी की जांच, गुणवत्तापूर्ण बीज और चारे की आपूर्ति, मछली रोगों की जांच, फसल बीमा पर 50% सब्सिडी, तालाबों के नवीनीकरण पर सब्सिडी, सोलर सिस्टम पर 60% सब्सिडी और मछली पकड़ने के जाल की खरीद पर सब्सिडी शामिल हैं। मछली पालक इन सभी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय को बेहतर बना सकते हैं।
FAQ
प्रश्न: हरियाणा मत्स्य पालन सब्सिडी योजना का लाभ कौन ले सकता है?
हरियाणा राज्य के स्थाई निवासी अनुसूचित जाति वर्ग के मछली पालक, जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक है और जो किसी सरकारी नौकरी में नहीं हैं, इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
प्रश्न: दूसरे से पांचवें वर्ष तक कितनी सब्सिडी मिलती है?
लाभार्थी को 40 प्रतिशत वास्तविक लीज राशि या 40,000 रुपए प्रति हेक्टेयर, जो भी कम हो, अनुदान के रूप में दिया जाता है।
प्रश्न: पहले साल की लीज राशि पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
पहले साल की लीज राशि पर 50 प्रतिशत या 50,000 रुपए प्रति हेक्टेयर, जो भी कम हो, सब्सिडी दी जाती है।
प्रश्न: अधिकतम कितने हेक्टेयर पर सब्सिडी मिलती है?
यह सब्सिडी अधिकतम चार हेक्टेयर तक ही दी जाती है।
प्रश्न: आवेदन के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?
आवेदन के लिए अनुबंध पत्र, जाति प्रमाण पत्र, जन्मतिथि प्रमाण, पहचान पत्र, मत्स्य प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, भूमि रिकार्ड, मत्स्य बीज खरीद की रसीद और तालाब की फोटो की जरूरत होती है।
प्रश्न: नदियों और नहरों के पट्टेदारों को क्या लाभ मिलता है?
अधिसूचित जलक्षेत्रों, नदियों, नालों और नहरों की बोली के बाद सफल बोलीदाता-पट्टेदार को अधिकतम पांच लाख रुपए तक का अनुदान प्रदान किया जाता है।