https://www.choptaplus.in/

सिरसा में संयुक्त किसान मोर्चा ने विधायक केहरवाला को सौंपा ज्ञापन, 7 प्रमुख मुद्दों पर कार्रवाई की मांग

 
कालांवाली विधायक शीशपाल केहरवाला को किसानों की मांगों का प्रारूप सौंपते किसान संगठन प्रतिनिधि

सिरसा। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान-मजदूरों की राष्ट्रव्यापी मांगों और सरकार की वायदाखिलाफी से जुड़े पत्रों की प्रतियां विपक्षी दलों के विधायकों एवं सांसदों को सौंपने के कार्यक्रम के तहत हलका कालांवाली के विधायक शीशपाल केहरवाला को किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने मांगों का प्रारूप सौंपा।

शिष्टमंडल में ऑल इंडिया किसान सभा 1936, राष्ट्रीय किसान मंच, अखिल भारतीय किसान सभा और बीकेयू एकता अग्राह्य से जुड़े प्रतिनिधि शामिल रहे। किसान संगठनों ने विधायक से अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर संबंधित मुद्दों पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाने का अनुरोध किया।

9 दिसंबर 2021 के आश्वासनों को पूरा करने की मांग

किसान संगठनों ने कहा कि 16 जनवरी 2026 को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान के बाद देशभर के गांवों में किसानों ने तब तक व्यापक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है, जब तक 9 दिसंबर 2021 को केंद्र सरकार की ओर से लिखित रूप से आश्वस्त सभी मांगें पूरी नहीं होतीं।

संगठनों ने 12 फरवरी 2026 की आम हड़ताल और 10 अगस्त 2026 के जेल भरो संघर्ष का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि इन आंदोलनों के जरिए किसान, मजदूर, खेत मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं समेत विभिन्न वर्गों ने अपनी मांगें उठाईं।

एनीमिया मुक्त हरियाणा अभियान की समीक्षा, एसडीएम ने स्वास्थ्य जांच और आयरन-फोलिक एसिड वितरण तेज करने के दिए निर्देश

सिरसा के 6 गांवों में सिंचाई के पानी का संकट, किसानों का धरना; अवैध पाइप-मोटर हटाने की मांग

किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

किसान संगठनों की ओर से रखी गई प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते का विरोध और सभी मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करने की मांग शामिल है। इसके अलावा सभी फसलों के लिए सी2+50 प्रतिशत की दर से कानूनी रूप से गारंटीकृत एमएसपी और खरीद की गारंटी देने की मांग की गई है।

संगठनों ने ग्रामीण कर्जग्रस्तता और किसानों तथा दिहाड़ी मजदूरों की आत्महत्याओं को समाप्त करने के लिए व्यापक कर्जमाफी तथा प्रत्येक किसान आत्महत्या पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी रखी है।

मजदूरों और मनरेगा से जुड़ी मांगें भी शामिल

किसान संगठनों ने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने तथा सभी मजदूरों के लिए 31 हजार रुपये न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की है।

इसके साथ ही मनरेगा को बहाल कर 200 दिनों के काम और 700 रुपये दैनिक मजदूरी की गारंटी देने की मांग रखी गई है।

संगठनों ने बिजली निजीकरण विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग भी की है।

भूमि अधिग्रहण को लेकर भी मांग

किसान संगठनों ने जबरन भूमि अधिग्रहण नहीं करने और कॉरपोरेट समर्थक भूमि पूलिंग का विरोध किया है। उन्होंने भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013, वन अधिकार अधिनियम, 2006 तथा पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 के आधार पर अधिकारों की रक्षा की मांग की है।

सिरसा क्षेत्र के लिए स्थानीय मांगें भी रखीं

स्थानीय स्तर पर किसान संगठनों ने भारतीय खाद्य निगम को मजबूत करने तथा एफसीआई के साइलो में अडानी और लीप इंडिया के द्वैधाधिकार को समाप्त करने की मांग की।

इसके अलावा कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का विरोध किया गया है। उर्वरक, ईंधन, पेट्रोल और डीजल की कमी तथा कालाबाजारी खत्म करने, सब्सिडी बहाल करने और कीमतों पर नियंत्रण की मांग भी रखी गई है।

बीमा, सिंचाई और सामाजिक सुरक्षा पर जोर

किसान संगठनों ने सार्वजनिक क्षेत्र में फसल एवं पशुधन बीमा योजना बनाने की मांग की। इसके साथ ही जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन के माध्यम से सभी खेतों तक सिंचाई पहुंचाने और 10 हजार रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने की मांग की गई है।

बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं के लिए पर्याप्त धनराशि के साथ पारदर्शी एवं प्रभावी राहत व्यवस्था की मांग भी स्थानीय मांगों में शामिल है।

शिक्षा, अनुसंधान और सहकारिता से जुड़े मुद्दे

संगठनों ने अनुसंधान एवं विकास क्षेत्र के लिए केंद्रीय बजट का 6 प्रतिशत और शिक्षा के लिए सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत आवंटित करने की मांग रखी है।

इसके अलावा सहकारी समितियों को कॉरपोरेट कब्जे से बचाने और किसानों की भूमिका बढ़ाने के लिए सहकारिताओं के लोकतंत्रीकरण की मांग भी की गई है।

किसान संगठनों ने विधायक शीशपाल केहरवाला से इन मांगों को केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष उठाने तथा संबंधित मुद्दों पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाने का अनुरोध किया।

Rajasthan