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ग्रुप-D कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत, अब 30% कोटे से बन सकेंगे क्लर्क; SETC परीक्षा की प्रक्रिया शुरू

 
: हरियाणा ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए क्लर्क प्रमोशन के लिए SETC परीक्षा 2026

हरियाणा सरकार ने कॉमन कैडर के ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए क्लर्क पद पर प्रमोशन का रास्ता साफ कर दिया है। राज्य सरकार ने सभी पात्र कर्मचारियों को एसईटीसी (स्टेट इलीजिबिलिटी टेस्ट इन कंप्यूटर एप्रीसिएशन एंड एप्लीकेशन) पार्ट-वन परीक्षा में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की तरफ से सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे पात्र कर्मचारियों के आवेदन पत्रों और ई-प्रवेश पत्रों का सत्यापन व प्रमाणीकरण सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी पात्र कर्मचारी परीक्षा से वंचित न रहे।

यह कदम इस साल लागू हुए हरियाणा क्लेरिकल (रिक्रूटमेंट एंड कंडीशन ऑफ सर्विस) एक्ट-2026 के बाद उठाया गया है, जिसे 3 जून 2026 को सरकारी गजट में प्रकाशित किया गया था। नए कानून के तहत ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए क्लर्क पद पर प्रमोशन का कोटा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है। यानी क्लर्क कैडर में प्रमोशन के जरिए भरे जाने वाले पदों में अब ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए पहले से ज्यादा अवसर होंगे।

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पांच साल की सेवा, 12वीं पास और SETC पार्ट-वन अनिवार्य

नए प्रावधानों के तहत ग्रुप-डी कर्मचारी से क्लर्क पद पर प्रमोशन के लिए कम से कम पांच साल की सेवा पूरी होना जरूरी है। कर्मचारी का 10+2 या इसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होना भी अनिवार्य है। इसके अलावा एसईटीसी पार्ट-वन पास करना होगा, जिसमें कंप्यूटर दक्षता की जांच होती है। सरकारी प्रावधानों के अनुसार एसईटीसी पार्ट-वन को कंप्यूटर नॉलेज टेस्ट और पार्ट-टू को टाइपिंग टेस्ट के रूप में निर्धारित किया गया था। एसईटीसी परीक्षा पास करना सालाना इंक्रीमेंट और क्लास-डी पदों से प्रमोशन के लिए भी अनिवार्य है।

सेवा रिकॉर्ड भी बनेगा प्रमोशन का आधार

सिर्फ शैक्षणिक योग्यता और परीक्षा पास करना ही प्रमोशन के लिए काफी नहीं होगा। कर्मचारी की एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) में कम से कम 70 प्रतिशत प्रविष्टियां ‘गुड’ या ‘वेरी गुड’ श्रेणी की होनी चाहिए। इसके अलावा कर्मचारी के खिलाफ कोई विभागीय या न्यायिक कार्रवाई लंबित नहीं होनी चाहिए और सेवा रिकॉर्ड में ईमानदारी को लेकर प्रतिकूल टिप्पणी भी नहीं होनी चाहिए।

पहले 10-15 साल तक करना पड़ता था इंतजार

सरकार के मुताबिक पुराने प्रावधानों में ग्रुप-डी कर्मचारियों को क्लर्क बनने के लिए कई बार 10 से 15 साल तक इंतजार करना पड़ता था। प्रमोशन कोटा बढ़ने और पात्रता की प्रक्रिया स्पष्ट होने से अब ज्यादा कर्मचारियों को समय पर करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पहले कहा था कि इस फैसले से कर्मचारियों को करियर में आगे बढ़ने के ज्यादा अवसर मिलेंगे और भर्ती मानदंडों में स्पष्टता आएगी।

क्यों जरूरी है SETC परीक्षा?

नई व्यवस्था में सरकार ने क्लर्क पद के लिए कंप्यूटर दक्षता को महत्वपूर्ण योग्यता के तौर पर शामिल किया है। अब केवल वरिष्ठता और अन्य विभागीय पात्रताएं पूरी करने से क्लर्क पद पर प्रमोशन का रास्ता साफ नहीं होगा, बल्कि संबंधित कर्मचारी को निर्धारित कंप्यूटर योग्यता भी हासिल करनी होगी। इससे विभागीय स्तर पर क्लर्क कैडर में पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों की कंप्यूटर संबंधी दक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

विभागों को क्या करना है?

सरकार के आदेश के मुताबिक सभी विभागों को अपने अधीनस्थ पात्र ग्रुप-डी कर्मचारियों के आवेदन फॉर्म और ई-एडमिट कार्ड की जांच कर उन्हें प्रमाणित करना है। विभाग किसी भी पात्र कर्मचारी को एसईटीसी पार्ट-वन परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोक सकेंगे। मानव संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी निर्धारित पात्रता और अन्य आवश्यक शर्तें पूरी करते हैं, उन्हें परीक्षा में बैठने से किसी भी स्तर पर नहीं रोका जाएगा।

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