पति के निधन के बाद 2 बेटियों के भविष्य के लिए 10 साल बाद पढ़ाई शुरू की, मंजू बनीं पटवारी, गांव में हुआ ढोल-नगाड़ों से स्वागत

 

भीलवाड़ा शहर के चंद्रशेखर आजाद नगर की 32 वर्षीय मंजू सुवालका ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो मुश्किल से मुश्किल हालात में भी सफलता हासिल की जा सकती है। कोरोना महामारी के दौरान पति के निधन के बाद दो मासूम बेटियों की जिम्मेदारी संभालने वाली मंजू ने कड़ी मेहनत से राजस्थान पटवारी भर्ती परीक्षा पास की। इसके अलावा उन्होंने तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में भी सफलता हासिल की है।

कैसे बदली मंजू की जिंदगी? कोरोना ने छीन लिया था पति

मंजू सुवालका के पति विमलेश एक निजी बैंक में मैनेजर थे। कोरोना महामारी के दौरान उदयपुर में सेवाकाल के दौरान उनका कोरोना संक्रमण से असमय निधन हो गया। पति के जाने के बाद मंजू के कंधों पर दस और पांच साल की दो बेटियों की परवरिश का जिम्मा आ गया।

10 साल बाद किताबों से दोबारा की पढ़ाई की शुरुआत

करीब दस सालों तक पढ़ाई से दूर रहने के बाद मंजू ने अपने बिखरे सपनों को समेटा और दोबारा पढ़ाई शुरू की। उन्होंने नियमित रूप से पांच से छह घंटे पढ़ाई की। मंजू का कहना है कि असफलता को काफी हावी नहीं होने देना चाहिए। पति के निधन के बाद वह टूट गई थीं, लेकिन विषम परिस्थितियों से बाहर निकलकर सफलता हासिल की। इस सफलता का श्रेय उन्होंने अपनी दोनों बेटियों को दिया है।

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पटवारी भर्ती परीक्षा में मिली सफलता

मंजू सुवालका ने राजस्थान पटवारी भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) की ओर से पटवारी भर्ती परीक्षा का आयोजन किया जाता है। पटवारी राजस्व विभाग में भूमि अभिलेखों के रखरखाव और राजस्व संग्रह के लिए जिम्मेदार होते हैं।

तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में भी मिली कामयाबी

मंजू की सफलता सिर्फ पटवारी भर्ती तक सीमित नहीं है। उन्होंने तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में भी बेहतरीन रैंक हासिल की है। एक ही समय में दो सरकारी नौकरियों में चयन होना उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है।

पैतृक गांव भोली में ढोल-नगाड़ों से हुआ स्वागत

मंजू के पटवारी पद पर चयन की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव भोली में खुशियों का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरे गांव में ढोल-नगाड़ों की थाप गूंज उठी। ग्रामीणों और परिजनों ने फूल-मालाओं से मंजू का पलक-पावड़े बिछाकर भव्य स्वागत किया। गांव की गलियों में मंजू के सम्मान में एक गौरवमयी जुलूस निकाला गया।

ग्रामीणों ने कहा कि मंजू ने अपनी मेहनत और हिम्मत से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन किया है।

समाज के लिए बनी मिसाल, जल्द होगा सार्वजनिक सम्मान

अखिल राजस्थान सुवालका संघ ट्रस्ट के प्रवक्ता कैलाश सुवालका हलेड़ ने इस पल को पूरे समाज के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि मंजू का यह संघर्ष क्षेत्र की हर बेटी और महिला के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। मंजू सुवालका को समाज की ओर से जल्द ही सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा ताकि शिक्षा और हौसले की यह अलख दूसरी बेटियों के दिलों में भी कामयाबी की नई उम्मीद जगा सके।

राजस्थान पटवारी भर्ती से जुड़ी अहम जानकारी

राजस्थान में पटवारी के पदों पर भर्ती के लिए आरएसएसबी (RSSB) परीक्षा आयोजित करता है। हाल ही में 3705 पदों पर पटवारी भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की गई थी। पटवारी बनने के लिए उम्मीदवार का स्नातक होना अनिवार्य है और आयु सीमा 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और दस्तावेज़ सत्यापन शामिल है।

मंजू सुवालका की यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन में मुश्किलों का सामना कर रहा है। कोरोना काल में पति को खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दो बेटियों की परवरिश के साथ पढ़ाई जारी रखी। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा जाए तो हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मंजू की तरह नियमित पढ़ाई और आत्मविश्वास बनाए रखें। याद रखें, मेहनत और लगन से हर मुश्किल को हराया जा सकता है।