हरियाणा की 2 बेटियों ने रचा इतिहास, बनीं NDA में देश की पहली महिला फाइटर पायलट, प्रेरणादायक है दोनों की कहानी
हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छपार गांव निवासी इशिता सांगवान और भागवी गांव निवासी मीनाक्षी ने देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने साढ़े तीन साल की ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है और हैदराबाद में 13 जून को दोनों ने कमीशन प्राप्त कर लिया। इशिता और मीनाक्षी की पहली पोस्टिंग तेलंगाना के बीदर सेंटर में हुई है, जहां से वे अब देश के लिए लड़ाकू विमान उड़ाएंगी। यह पहला अवसर है जब एनडीए के जरिए दो महिलाएं फाइटर पायलट बनी हैं।
इशिता सांगवान के पिता चरण सिंह सांगवान ने बताया कि वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि बेटियां भी एनडीए के जरिए सेना में जा सकती हैं। इससे पहले इशिता का सपना सिविल सर्विसेज में जाने का था, लेकिन कोर्ट के इस फैसले के बाद उसने अपना मन बदल दिया। उस दौरान इशिता 12वीं की परीक्षा की तैयारी में जुटी थी।

कोर्ट के निर्णय के एक महीने बाद ही एनडीए की लिखित परीक्षा थी, जिसे इशिता ने पास कर लिया। 6 अगस्त 2022 को ज्वाइनिंग लेटर घर पहुंचा और 9 अगस्त को इशिता ने पुणे जाकर ज्वाइन कर लिया। बता दें कि इशिता ने 12वीं में 90.60 फीसदी अंक हासिल किए थे, जबकि 10वीं में भी 90 फीसदी अंक थे। उनकी मां अनीता देवी शिक्षिका हैं। इशिता की एक जुड़वां बहन है, जो फिलहाल एमबीबीएस कर रही है।
मीनाक्षी के पिता रविंद्र का भी सेना से जुड़ाव रहा है। उनकी बेटी एयरफोर्स में जाकर देश सेवा करेगी। मीनाक्षी की इस उपलब्धि पर गांव भागवी में खुशी का माहौल है। सरपंच प्रमिला कुमारी ने बताया कि रविवार को होनहार बेटी के सम्मान में ग्राम पंचायत की ओर से सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसकी तैयारियां चल रही हैं।
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बेटी की इस उपलब्धि पर पूरे गांव को नाज है। मीनाक्षी एनडीए के जरिए सेना में जाने वाली 19 बेटियों के बैच में शामिल थीं। पुणे के खड़गवासला में उन्होंने तीन साल की ट्रेनिंग पूरी की। ट्रेनिंग पूरी होने पर मीनाक्षी को एयरफोर्स विंग मिली। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद में छह माह की फाइटर प्लेन उड़ाने की ट्रेनिंग ली, जो हाल ही में पूरी हुई। यह ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ही दोनों को 13 जून को कमीशन मिला।
हैदराबाद के डुंडीगल एयर फोर्स अकादमी में 13 जून को आयोजित संयुक्त स्नातक परेड के दौरान कुल 231 फ्लाइट कैडेट्स को कमीशन दिया गया, जिसमें 37 महिलाएं शामिल थीं। इनमें से 5 महिला कैडेट्स को एयरफोर्स में कमीशन मिला, जिनमें दो को फाइटर स्ट्रीम के लिए विंग्स दिए गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समारोह की समीक्षा करते हुए कहा कि महिलाओं की बढ़ती संख्या से वायुसेना अधिक मजबूत और संतुलित हो रही है।
समारोह में नौसेना, कोस्ट गार्ड और विदेशी प्रशिक्षुओं को भी विंग्स दिए गए। फ्लाइंग ब्रांच में फ्लाइंग ऑफिसर आशीष कुमार यादव ने पहला स्थान हासिल किया और उन्हें नवानगर स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से नवाजा गया। नेविगेशन स्ट्रीम में फ्लाइंग ऑफिसर एकता गुप्ता और ग्राउंड ड्यूटी में फ्लाइंग ऑफिसर दिव्यांशी सिंह को प्रेसिडेंट्स प्लेक दिया गया।
इशिता सांगवान का परिवार फिलहाल राजस्थान के झुंझुनूं में गुढ़ा गोरजी में रहता है। उनके पिता राजस्थान के झुंझुनूं में स्कूल प्रिंसिपल हैं। इशिता ने राजस्थान के नागौर जिले के दीगाना स्थित राणा इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ाई की है। बता दें कि इशिता सांगवान जून 2025 में पुणे में तीन साल की ट्रेनिंग पूरी कर पैतृक गांव छपार पहुंची थीं। उस दौरान वह सीधे गांव के बाबा जमुना दास मंदिर पहुंची और वहां मत्था टेक कर महंत से आशीर्वाद लिया।
भारतीय वायुसेना में पहली महिला फाइटर पायलटों की कमीशनिंग का यह लंबे इंतजार का पल था। 2016 में देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं, लेकिन एनडीए के जरिए यह पहली बार हुआ है। इससे पहले, महिलाएं एनडीए नहीं जा सकती थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह रास्ता खुला है।
